वोटर लिस्ट विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के आचरण पर जताई नाराजगी, चुनाव आयोग को नोटिस
3:17 PM, Oct 15, 2026
R Express भारत
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देश की सबसे बड़ी अदालत ने चुनाव आयोग की नई वोटर लिस्ट नीति और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की याचिकाओं पर एक बड़ा कदम उठाया है।

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नई दिल्ली।देश की सबसे बड़ी अदालत ने चुनाव आयोग की नई वोटर लिस्ट नीति और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की याचिकाओं पर एक बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने इस पूरे मामले को लेकर चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हालांकि, राहत की इस खबर के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दिग्गजों के रवैये पर बेहद तीखी टिप्पणी की है। अदालत ने साफ लफ्जों में चेतावनी दी है कि कोई भी ताकत न्यायपालिका पर दबाव नहीं बना सकती।
अदालत परिसर में मार्च करने पर भड़का कोर्ट
यह पूरा विवाद बीते 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में विपक्षी नेताओं द्वारा किए गए एक मार्च से जुड़ा है। जब अदालत में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो सरकारी वकीलों ने जजों के सामने विपक्षी नेताओं के इस कदम का मुद्दा उठाया। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया।
चीफ जस्टिस ने साफ कहा, "हम किसी बंद कमरे या ऊंचे टावर में बैठकर काम नहीं कर रहे हैं। न्यायपालिका को डराने या उस पर धौंस जमाने की कोशिश कोई न करे।" अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका को स्वीकार करने और चुनाव आयोग को नोटिस भेजने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि नेताओं के इस तरीके को सही मान लिया गया है। कोर्ट ने राहुल गांधी से इस बर्ताव पर सफाई मांगी है।
वोटर लिस्ट में हेरफेर का है गंभीर आरोप
विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के नेताओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग की नई प्रक्रिया (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के नाम पर देश भर में करीब 13 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब कर दिए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बाकी सहयोगियों की राय लिए बिना, अपने स्तर पर मनमाने तरीके से यह बड़े फैसले लिए हैं। इसी के विरोध में विपक्ष लगातार ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग कर रहा है।
जंतर-मंतर पर हंगामा और नेताओं की गिरफ्तारी
इस सियासी खींचतान के बीच दिल्ली का जंतर-मंतर भी अखाड़ा बना हुआ है। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे इस आंदोलन में 'कॉकरोच जनता पार्टी' सीजेपी नाम के एक नए संगठन ने भी मोर्चा खोल दिया। बिना इजाजत प्रदर्शन करने और सुरक्षा घेरा तोड़ने के आरोप में पुलिस ने सीजेपी के बड़े नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को दबोच लिया है। अदालत ने इन दोनों नेताओं को 5 दिनों के लिए जेल भेज दिया है।
अदालत ने दिए सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश
प्रदर्शनों को दबाने के लिए दिल्ली में कई मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और पुलिस की सख्ती को लेकर भी अदालत में तीखी बहस हुई। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त हिदायत दी है कि सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे आंदोलन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी सीसीटीवी कैमरे के फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग को संभाल कर रखें, ताकि सच सामने आ सके। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से पूछा है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की रोक को लेकर क्या नियम तय किए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई अब दो हफ्ते बाद होगी।

