लग्जरी गाड़ियां छोड़ ई-रिक्शा से विधानसभा पहुंचे यूपी के वित्त मंत्री, सुरेश खन्ना ने जनता से क्यों की अपील?
3:41 PM, Jun 8, 2026
R Express भारत
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वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और खाड़ी देशों में लगातार बनी रहने वाली भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच, उत्तर प्रदेश के नीति निर्माताओं ने

लग्जरी गाड़ियां छोड़ ई-रिक्शा से विधानसभा पहुंचे यूपी के वित्त मंत्री सौ0 RExpress भारत
लखनऊ।वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और खाड़ी देशों में लगातार बनी रहने वाली भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच, उत्तर प्रदेश के नीति निर्माताओं ने ऊर्जा संरक्षण को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। इस मुहिम की कमान खुद सूबे के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने संभाल रखी है। सोमवार को लखनऊ की सड़कों पर एक बेहद अलग नजारा देखने को मिला, जब वित्त मंत्री भारी-भरकम सरकारी सुरक्षा लश्कर और लग्जरी गाड़ियों को छोड़कर एक आम ई-रिक्शा में सवार होकर विधानसभा स्थित अपने कार्यालय पहुंचे।
यह कोई पहला मौका नहीं है जब वित्त मंत्री इस तरह के लीक से हटकर रूप में नजर आए हों। दरअसल, यह उनके उस व्यक्तिगत और राजनैतिक संकल्प का हिस्सा है, जिसके तहत वह पर्यावरण संरक्षण और देश की अर्थव्यवस्था को ईंधन के बोझ से बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
चौथी बार ई-रिक्शा की सवारी, संकल्प पर अडिग
सचिवालय के सूत्रों और चश्मदीदों के मुताबिक, मंत्री सुरेश कुमार खन्ना अपने सरकारी आवास से बिना किसी तामझाम के निकले और ई-रिक्शा की मदद से विधानसभा पहुंचे। अधिकारियों और आम जनता के लिए यह दृश्य कौतूहल के साथ-साथ प्रेरणा देने वाला भी था। यह चौथी बार है जब उन्होंने कार्यालय आने-जाने के लिए इस पर्यावरण-अनुकूल साधन को चुना।अगर उनके पिछले कुछ हफ्तों के सफरनामे पर नजर डालें, तो वह ऊर्जा संरक्षण के इस अभियान में पूरी तरह रंगे नजर आते हैं। इससे पहले वह एक बार साइकिल से, एक बार मोटरसाइकिल (न्यूनतम ईंधन खपत के लिए) और दो बार पहले भी ई-रिक्शा से सफर कर चुके हैं। वित्त मंत्री ने साफ किया है कि उन्होंने अपने व्यस्त जीवन में से सप्ताह का कम से कम एक दिन 'पेट्रोलियम रहित' या 'न्यूनतम ईंधन' वाले साधनों के लिए आरक्षित कर दिया है।
विधानसभा पहुंचने के बाद मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में सुरेश कुमार खन्ना ने इस कदम के पीछे की गंभीर वजहों को साझा किया। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। खाड़ी क्षेत्र में लगातार जारी अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर हमेशा तलवार लटकी रहती है। भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश के लिए ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है, और इसकी शुरुआत बड़े बदलावों से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी व्यक्तिगत आदतों से होती है।वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि,ऊर्जा संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी या कोई कागजी नीति नहीं है, बल्कि यह देश के हर एक नागरिक का राष्ट्रीय दायित्व है। हमारा एक छोटा सा कदम देश की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ी मजबूती दे सकता है।
उत्तर प्रदेश के वित्तीय प्रबंधन को संभालने वाले मंत्री ने प्रदेशवासियों और युवाओं से सीधे संवाद करते हुए तीन मुख्य साधनों को अपनी जीवनशैली में शामिल करने का आग्रह किया कि,कम दूरी के कामों के लिए लोग गाड़ियों की जगह साइकिल को प्राथमिकता दें, जिससे सेहत और पर्यावरण दोनों सुधरेंगे।स्थानीय यात्राओं के लिए बैटरी चालित ई-रिक्शा का प्रयोग करें ताकि कार्बन फुटप्रिंट को कम किया जा सके। निजी वाहनों पर निर्भरता कम करके बसों और मेट्रो जैसी व्यवस्थाओं का लाभ उठाएं।
अर्थव्यवस्था और राष्ट्रहित का अनूठा गणित
अपने संबोधन के आखिर में वित्त मंत्री ने एक बड़ा गणितीय और व्यावहारिक तर्क सामने रखा। उन्होंने कहा कि, यदि देश का हर नागरिक सप्ताह में सिर्फ एक दिन किसी भी रूप में ईंधन बचाने का नियम बना ले, तो राष्ट्रीय स्तर पर अरबों रुपये के विदेशी मुद्रा भंडार की बचत होगी। यह बची हुई राशि देश के विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी ढांचों पर खर्च की जा सकती है।लखनऊ के राजनैतिक गलियारों में वित्त मंत्री के इस कदम की काफी सराहना हो रही है। जानकारों का मानना है कि जब शीर्ष पदों पर बैठे लोग खुद को जमीन पर उतारकर मिसाल पेश करते हैं, तो उसका असर जनता पर नीतिगत विज्ञापनों से कहीं ज्यादा गहरा और प्रभावी होता है। अब देखना यह है कि उत्तर प्रदेश की जनता अपने वित्त मंत्री की इस अनूठी और जरूरी अपील को किस हद तक अपने दैनिक जीवन में उतारती है।

